प्याज की खेती से अधिक उपज प्राप्त करने की नई विधि

प्याज की खेती (Pyaj ki kheti) | आधुनिक भारत में प्याज की फसल एक बहुत ही अधिक महतवपूर्ण फसल है। प्याज़ एक प्रकार की नकदी फसल है। इस फसल को कई तरीके की बीमारियों के उपचार के लिए भी प्रयोग में लेट है। सबसे ज्यादा गर्मियों में लू से बचने के लिए इसका सेवन किया जाता है। और प्याज़ का उपयोग गुर्दे की बीमारी में भी करते है।

इसमें विटामिन्स भरपूर मात्रा में पायी जाती है, जैसे कि विटामिन C, फास्फोरस इत्यादि। भारत में प्याज की मांग को देखते हुए किसान प्याज़ को जायद ऋतु को छोड़कर बाकि दोनों ऋतु में उगते हैं। प्याज़ का प्रयोग आयेदिन सलाद सब्जी आचार में किया जाता है जिससे इसकी मांग भारत में बाद गयी है अन्य सब्जियों के मुकाबले।

प्याज की खेती (Pyaj ki kheti) के लिए जलवायु

प्याज़ के लिए साधारण जलवायु पर्याप्त होती है। अगर वातावरण में कुछ प्रतिशत नमी भी मौजूद है तब भी हम प्याज की खेती कर सकते है। बस ध्यान रखना होता है कि नमी कुछ ज्यादा या बरसात के दिन नहीं होने चाहिए नहीं तो फसल को नुकसान भी पहुंच सकता है। इसलिए इसकी खेती करते समय मौसम का खास ख्याल रखना चाहिए। क्युकी प्याज के जो कंद होते है उनको सही आकार में आने के लिए अधिक तापमान की आवश्कता होती है।

एक बार खेत की मिटटी को भी चेक करा लेना चाहिए की उसमे किसी प्रकार की कोई कमी तो नहीं है। प्याज़ की खेती के लिए उपजाऊ दोमट मिटटी ठीक रहती है, ज्यादा क्षारीय और अम्लीय मिटटी से फसल को नुक्सान हो सकता है।

प्याज की खेती | Pyaj Ki Kheti
प्याज की खेती

प्याज की फसल उन्नतशील प्रजातियां

भीमा सुपर, भीमा गहरा लाल, एग्री फाउंड लाईट रेड, कल्याणपुर रेड राउंड, पूसा रेड, एन- 257-1, अर्का कल्याण, पूसा रतनार, हिसार- 2, अर्का प्रगति, अर्का निकेतन, वी एल- 76,  अर्का कीर्तिमान, अर्का लाइम।

खाद एवं उवर्रक

Pyaj ki kheti से पहले हमे अपने खेत की मिटटी का सम्पूर्ण ज्ञान होना चाहिए कि उसमे पोषक तत्वों की कितनी मात्रा है और किसकी कितनी कमी है।  इसके लिए हमे अपने नज़दीकी सहायता केंद्र की मदद लेनी चाहिए। सर्वप्रथम फसल की बुबाई रोपाई से पहले खेत में सड़ी हुई गोबर की खाद डालनी चाहिए इससे फसल की उपजाऊ सकती बढ़ती है। फसल में नाइट्रोजन इत्यादि पदार्थो का जरुरत के अनुसार छिड़काव करना चाहिए कुछ नाइट्रोजन की मात्रा को के एक से दो महीने के बाद फसल में देनी चाहिए।

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प्याज की फसल की बुवाई

यदि बीज से पौध बनाकर नर्सरी द्वारा बुबाई करनी होती है तब पौध को मई के अंतिम सप्ताह में बो देते है। हरी प्याज की फसल के लिए प्याज के कंदो को बोना पड़ता है। इसके लिए प्याज के कंदो को जुलाई के बाद बोते है। फसल की बुबाई तक कंद सही रूप से बन जाये तो इसके लिए बीजो की बुबाई जनवरी के अंतिम में सुरु कर देते है। इसकी फसल लगाने के लिए एक हैक्टर में 8-10 Kg बीज पर्याप्त होता है। ध्यान रहे कि फसल में उचित जल निकास की सुविधा होनी चाहिए।

नर्सरी में भी खाद और उर्वरक को सही मात्रा में डालना चाहिए। नहीं तो हमारी फसल के लिए पौध सही रूप से नहीं बनती है। ये सभी प्रक्रिया अपना लेने के बाद बीजो की बुबाई कर देनी चाहिए। और फिर बुबाई के बाद 3 – 4 दिन बाद हलकी हलकी सिचाई नहीं करनी चाहिए। फसल में हर 10 – 15 दिन के अन्तराल पर सिचाई देते रहना चाहिए।

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