धान की खेती की पूरी जानकारी उन्नतशील किस्मे

Dhan ki kheti, करते समय हमे फसल में सिचाईं, निराई, गुड़ाई, और उसमे लगने वाले कीट, रोग इत्यादि विषयो का ज्ञान होना आवश्यक है। आज की इस पोस्ट में हम धान से जुड़े हुए कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों पर बात करेंगे। इसको हम Chawal ki kheti भी कहते है।

वानस्पतिक नाम  – ओराइजा सेटाइवा 

फैमिली  – ग्रेमिनी

धान की खेती के लिए उन्नतशील किस्मे

धान ओराइजा जीन्स का पौधा है। इस जीन्स के अंतर्गत 24 प्रजातियाँ आती है। इन 24 में से 22 जंगली व 2 प्रजातियाँ Orzya Sativa और Orzya Glaberrima की खेती की जाती है। ओराइजा सेटाइवा की 3 उपप्रजातियाँ होती है। 

  1. इण्डिका  – इसको मुख्यता भारत में उगाया जाता है।
  2. जपोनिका – इसको ज्यादातर जापान में उगाते है।
  3. जवानिका  – इसको इंडोनेशिया में उगाया जाता है।

खेत में सीधी बुवाई करने के लिए किस्में  -:

साकेत-4, गोविन्द, कावेरी, नरेंद्र धान-1, नरेंद्र धान-97, N-22, बाला, NDR-84, झोना-349. 

 रोपाई द्वारा बुवाई की किस्में  -:

प्रसाद, मनहर पूसा 169 , पूसा 33, रतना , VLK 35, नर्मदा , पंत धान-4, जया , IR-24 सरजू-52 ,

 ऊसर भूमि के लिए किस्में  -:

 साकेत-4, ऊसर-1, पूसा 2-21, झोना-349, जया, IR-24 

 सुगन्धित किस्में  -:

नगीना 10 बी, बासमती 370, हंसराज, बासमती-1, रामभोग, कनकजीर, माही सुगंधा, कस्तूरी टी-9, 

Dhan ki kheti | धान की खेती के प्रकार 

Dhan Ki Kheti | धान की खेती | Digitaleducate
धान की खेती

1.  पौध विधि द्वारा या नर्सरी (Nursery or traditional method ) 

पौध लगाने के लिए छोटी-छोटी क्यारियों की आवश्यकता होती है। बीज शैय्या के लिए ऐसी भूमि छाटनी चाहिए जहाँ पर सिचाई की सुविधा प्राप्त हो। एक हेक्टेयर रोपाई के लिए 500 वर्ग मीटर पौध जगह पर्याप्त है। बीज शैय्या से पौध को उखाड़ते समय खेत का नम होना बहुत आवश्यक है। यदि खेत नम होगा तो पौध उखाड़ते समय जड़े नहीं टूटेगी। और जब हम पौध की खेत में रोपाई करते है उस समय कम से कम 3 सेंटीमीटर गहराई पर करनी चाहिए। रोपाई के बाद खेत में कम से कम 3.5 – 4.5 सेंटीमीटर तक पानी रहना चाहिए। 

2. डेपोग विधि 

पोधो को उगाने की यह विधि फिलीपींस में अधिक प्रचलित है। इस विधि में पौधे को बिना मृदा के उगाते है। बीज को 10-12 घंटे तक पानी में भिगो दिया जाता है, बाद में इनको निकालकर नम रखकर अंकुरित करते है। अंकुरित बीजो को 0.5 सेंटीमीटर मोटी सतहे पर फैलाकर पॉलीथिन या पुआल से ढक देते है। 

3. सीधे खेतो में बुवाई

इस विधि में अंकुरित बीजो को सीधा खेतो में छिटककर या पक्तियों में बोते है। अगर खेत में सिचाई की सुविधा नही है तो बरसात के शुरुआत होने पर इस विधि से बुवाई कर सकते है। 

धान की फसल में रोपाई

जब पौध 18-24 दिन की हो जाये तब धान की फसल में रोपाई शुरू कर देनी चाहिए। अगर खेत में जुताई अच्छी तरीके से की गयी है तो खेत में 20 x 30 सेंटीमीटर की दुरी पर पोधो को बोना चाहिए। पौध को 2-3 से.मी से ज्यादा गहरा नहीं बोना चाहिए। पोधो को खेत में लगाते समय कुछ मात्रा में पानी होना चाहिए।  

 

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सिचाई व्यवस्था 

धान की खेती(DHAN KI KHETI) रोपाई के दूसरे दिन हल्की-हल्की सिचाई कर देनी चाहिए। उसके बाद पानी को 5 से.मी तक रख सकते है अपने खेतो में। खेतो में पानी के इस स्तर को मुख्यता दानो के कड़े होने और कटाई से कुछ समय पहले तक रख सकते है। 

निराई – गुड़ाई  करना 

धान की फसल में निराई गुड़ाई करना बहुत जरुरी होता है। यह प्रक्रिया हम जब फसल 20 -30 दिन की हो जाती है तब शुरू कर सकते है। इसमें हम फसल में उगे हुए खरपतवारो व गंदगी घास आदि को खेतो में से निकालकर फेक देते है। यदि हम इनको खेतो में से नहीं निकलते है तो इनसे हमारी फसल को काफी नुकसान हो सकता है। इन्ही के द्वारा कीट हमारी फसल में आ सकते है। 

धान की फसल की कटाई 

निम्न्न प्रकार की जातियों में धान की फसल 100-150 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। फसल में बलियो के निकलने के 25 -30 दिन बाद फसल पक जाती है। यदि आप धान की कटाई किसी शक्ति चलित यन्त्र से करना चाहते है तो इसके लिए आपको खेत में से पानी को पहले निकल देना होगा जिससे खेत की मिटटी सूख जाये। अगर आप हसिया से काटना चाहते है तो आपको यह करने की आवश्यकता नहीं है।  

दोस्तों उम्मीद करता हु कि आपको हमारी ये पोस्ट धान की खेती या चावल की खेती काफी पसंद आयी होगी।

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